यानि, पीले पत्ते शाखों से बेजान होकर झड़ पड़े हैं...
लौट आये हैं धरती पर वापस अपने अस्तित्व को माटी में
समाहित करने ...पर कोंपलें झूम रहीं अभी तरु-शिखाओं पर अपने
हश्र से बेख़बर उसे क्या पता कि जड़ें पाताल के अंधेरे में किस तरह लड़ रहीं ,
मर रहीं, सड़ रहीं, फिर भी धरती का सत्व-जल सोख दिन-रात उसे सींच रहीं, और बचा रहीं
पूरे जंगल का वजूद !
***लोकचेतना का गद्य-साहित्य और जन-बातों का अनवरत विचार-प्रवाह***

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  पतझड़ का नया रूप - सुशील कुमार

>> Thursday, September 3, 2009


  • हालाकि ‘पतझड़’ का सृजन आज से लगभग आठ माह पूर्व ही हुआ था और समय-समय पर इस पर कई पोस्टें भी आयीं जिन पर लोगों ने अपनी सराहनीय प्रतिक्रियाएँ भी दी फिर भी मन के किसी कोने हमेशा यह इच्छा दबी हुई थी कि इसे एक ऐसा नेट-पत्रिका के रूप में होना चाहिये जो रूप-गुण में आकर्षक तो हो ही, साथ-साथ उसे तकनीकी दृष्टि से भी पाठकों को सुलभ कराया जा सके इस वेब-पत्रिका का मुख्य उद्येश्य प्रिंट-पत्रिका की तुलना में लोकचेतना और विचार-मंथन का एक ऐसा ब्लॉग बनाना था जहाँ पाठक आकर कुछ देर ठहर पायें और ब्लॉग-भ्रमण से संतुष्ट हो पायें। पर पता नहीं, मैं इस निर्माण में कहाँ तक सफल हो पाया हूँ ? इसका निर्णय खुद पाठक लेंगे तो ज्यादा अच्छा होगा।फिर भी इसके नये रूप की जो विशेषताएँ प्रकट हैं उस विन्दुबार यहाँ आपका ध्यान आकृष्ट किया जाता है-

  • १) इसकी छवि श्वेत-श्याम (black and white) वर्ण की है।

  • २) लिंक-बार में एक कालम My English Column नाम से है जहाँ अंग्रेजी भाषा के पाठकों के लिये

  • नई अथवा अनुदित सामग्री उपलब्ध होगी।

  • ३) पत्रिका में एक ही साईडबार रखा गया हैं (क्योंकि यह कोई कामर्शियल पत्रिका नहीं) जिसमें कई उपयोगी विजेट हैं, मसलन, सबसे उपर फ्लैश-लेबल है। किसी पोस्ट के रोमन-लिपि के लेबल को यह फ्लैश के रूप में दिखाता है। देखने के लिये फ्लैश-स्क्रीन पर सिर्फ़ माउस-कर्सर से उसके किसी कोने को स्पर्श करने की जरुरत है।

  • ४) दो और लेबल हैं। इसमें एक महत्वपूर्ण लेबलों का है जो बक्से में प्रदर्शित है और दूसरा ब्लाग के सभी

  • लेबलों का जिसे ड्रॉप-डाउन बटन में रखा गया है।

  • ५) फीड से रचनाएँ पढ़ने की सुविधा तो है ही, अगर कोई अपने ईमेल पर पत्रिका का अपडेट मंगाना चाहते हैं तो उन्हें फीडबर्नर के बक्से में अपना ई-मेल डालकर अनुदेशों का अनुसरण करना होगा ।

  • ६) इसी प्रकार ताज़ा टिप्पणियां के स्तंभ के अतिरिक्त गूगल का नया अनुवादक ( translator) टूल भी लगाया गया है जो भाषा की जगह उस देश के झंडे को विजेट में दिखाता है।

  • ७)अपनी पसंद के लगभग चालिस हिन्दी साईटों का ड्रॉप-डाउन लिंक बनाया गया है।

  • ...और भी बहुत कुछ है ‘पतझड़’ पर ,जिसे ध्यान से तजबीजने की जरुरत है। बस आप इन्हें देखकर बतायें कि क्या कमियाँ रह गयी हैं ताकि इसमें और भी आशातीत सुधार किया जा सके।

  • टिप्पणी: अब आप यहाँ नियमित रूप से पोस्ट पढ़ सकेंगे।


  • -सुशील कुमार।

6 comments:

अर्शिया September 3, 2009 at 5:36 PM  

इस जानकारी के लिए हार्दिक आभार।
( Treasurer-S. T. )

अशोक सिंह September 3, 2009 at 6:06 PM  

बहुत अच्छा और तकनीक से भरपूर।

हिमांशु । Himanshu September 4, 2009 at 6:20 AM  

नया स्वरूप बेहतर है ।

Rati September 4, 2009 at 8:13 AM  

नेट पर जितनी तीव्रता से आपने काम किया है काबिले तारीफ है।

शुभकामनाएँ

हाल में पोस्ट की गयी कुछ आलेखों के लिंक -

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